Index Search for 'फल्गुन' |
Shloka: | ततो देवाः सर्व एव तेन घोषेण बोधितः । मन्वाना देवराजं मां समाजग्मुर्विशां पते । दृष्ट्वा च मामपृच्छन्त किं करिष्यसिफल्गुन ॥ |
Reference: | 3.35.165.0.16(वनपर्व (आरण्यकपर्व)>यक्षयुद्धपर्व>पञ्चषष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः>श्लोक#16) |
Parva: | वनपर्व (आरण्यकपर्व) |
Upaparva: | यक्षयुद्धपर्व |
Adhyaya: | पञ्चषष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः |
Akhyana: | |
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