Index Search for 'फेनवत्यो' |
Shloka: | ततः सागरगा आपः कीर्यमाणाः समन्ततः । प्रादुरासन्सकलुसाःफेनवत्यो विशां पते ॥ |
Reference: | 3.33.143.0.18(वनपर्व (आरण्यकपर्व)>तीर्थयात्रापर्व>त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः>श्लोक#18) |
Parva: | वनपर्व (आरण्यकपर्व) |
Upaparva: | तीर्थयात्रापर्व |
Adhyaya: | त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः |
Akhyana: | |
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