Index Search for 'फलमश्नुते' |
Shloka: | अर्चयित्वा पितॄन्देवान्नियतो नियताशनः । सर्वकामसमृद्धस्य यज्ञस्यफलमश्नुते ॥ |
Reference: | 3.33.80.0.66(वनपर्व (आरण्यकपर्व)>तीर्थयात्रापर्व>अशीतितमोऽध्यायः (80)>श्लोक#66) |
Parva: | वनपर्व (आरण्यकपर्व) |
Upaparva: | तीर्थयात्रापर्व |
Adhyaya: | अशीतितमोऽध्यायः (80) |
Akhyana: | |
Search other sources: | search this word on other online resources
|