"अनुगीता-अन्वेषण-पृष्ठ"



Author : वेदांशु (Vedanshu)
Center/School : Sanskrit Center, JNU
Course : Computer Applications for Sanskrit, Special Center for Sanskrit Studies,J.N.U.
Semester/Year : Winter13
Under the supervision of : Dr. Girish Nath Jha (डॉ. गिरीशनाथ झा)

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Results for ' संस्कृत '


Shloka Reference Translation
एकं शास्तारमासाद्य शब्देनैकेन संस्कृताः । नाना व्यवसिताः सर्वे सर्पदेवर्षिदानवाः ॥14026011इस प्रकार सर्प, देवता, ऋषि और दानव - ये सब एक ही उपदेशक गुरु के पास गये थे और एक ही शब्द के उपदेश से उनकी बुद्धि का संस्कार हुआ तो भी उनके मन में भिन्न-भिन्न प्रकार के भाव उत्पन्न हो गये ।